दिव्यांगो का सहारा हैं सद्भावना समिति की निदेशक अपर्णा मिश्रा

15 Oct 2018 18:15:47 pm


पिता के अधूरे सपनों को साकार कर रहीं अपर्णा मिश्रा,हैं हजारों मुस्कान की वजह
 
दिव्यांगो का सहारा हैं सद्भावना समिति की निदेशक अपर्णा मिश्रा 
लखनऊ। नवरात्रि,साल के वो 9 दिन जब हम संसार को रचने वाली आदि शक्ति मां जगदम्बा के अलग-अलग रूपों की आराधना करते है।नवरात्रि स्पेशल के इस सेगमेंट में हम आपको समाज में मौजूद शक्ति के नौ अलग-अलग रूपों से रूबरू कराएंगे।नवरात्र के दिनों में पूजे जाने वाली सभी देवियों के रूप की प्रतिमूर्ति हमारे समाज में मौजूद हैं ।

 

शारदीय नवरात्र का छठा दिन मां कुष्माण्डा को समर्पित होता है।अत्यंत चमकीले और भास्वर स्वरुप वाली मां कात्यानी की पूजा अर्चना से साधक को अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है।मां की पूजा-अर्चना से भक्त को सुख और शांति की प्राप्ति होती है।ऐसे ही निस्वार्थ भाव से लोगों में खुशियां बांटने का काम कर रहीं हैं सद्भावना फाउंडेशन की कार्य-प्रबंध निदेशक अपर्णा मिश्रा।अपर्णा असहाय और दिव्यांगो को समाज में उचित स्थान दिलाने के लिए पिछले कई सालों से निस्वार्थ भाव से काम कर रहीं हैं।

अक्सर इंसान बेटे की चाह रखता है,क्योंकि माना जाता है की बेटा पिता के कामों को आगे बढ़ाता है।पर यहां बयार जरा उलटी बह रही है,अपने पिता की ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए अपर्णा मिश्रा हर मुमकिन कोशिश कर रहीं हैे,जो शायद एक बेटा भी नहीं कर पाता।15 अगस्त 1994 को पिता डॉ० एन.के मिश्रा द्वारा स्थापित गैर-सरकारी संगठन सद्भावना समिति की बाग-डोर अब अपर्णा संभाल रहीं हैं।अपर्णा बताती हैं की–“पिता ने सपना देखा था एक ऐसे समाज का जिसमें कोई तकलीफ में ना हो।सबके पास जीने की आजादी हो,एक ऐसे समाज का विकास हो जहां किसी को उनकी कमियों की वजह से भेद-भाव का सामना न करना पड़े।” एनजीओ का मुख्य उद्देश्य विशेष जरूरतों वाले बच्चों, युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा में कौशल और प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें अपने लिए खड़ा होने का साहस और काबिलियत प्रदान करना है।

 

सद्भावना समिति ने 25 मार्च, 1 99 8 को, ‘दीन दयाल मंदबुद्धी विकलांग विद्यालय’ की स्थापना की थी।ये स्कूल विशेष जरुरत वाले बच्चों के लिए बाराबंकी में खोला गया था।वही आज शहर और आस-पास के कई जिलों में सद्भावना समिति के अंतर्गत ‘सद्भावना अस्पताल’, ‘अपर्णा उपभोक्ता सेवा प्रा० लिमिटेड’, ‘अपर्णा एग्रोटेक’ और ‘एस्टर इंफ्राइट्स’ जैसे कई संस्थान चल रहें हैं।एनजीओ के योगदान को बढ़ाने के लिए, सद्भावना सेंटर फॉर सोशल रिसर्च एंड डेवलपमेंट नामक एक अलग विभाजन की स्थापना भी अपर्णा मिश्रा ने की थी। यह अनुसंधान, प्रभाव मूल्यांकन,निगरानी और मूल्यांकन, बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण और क्षमता निर्माण से संबंधित परियोजनाओं के साथ शुरू हुआ।


अपर्णा मिश्रा का मानना है की समाज में विकास तभी मुमकिन है जब समाज का हर इंसान अपने और अपने परिवार के लिए मौलिक संसाधनों को जुटा पाने में सक्षम हो।अपर्णा ने बाराबंकी, काकोरी, मालिहाबाद और आसपास के कुछ गांवों में अल्पसंख्यकों के लिए स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता केंद्र आयोजित किए हैं। उन्होंने बाराबंकी में अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए नेतृत्व विकास कार्यक्रम की शुरुआत की है। सद्भभावना अस्पताल में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि उन्हें सुरक्षित और सही उपचार प्रदान कराए जा सकें।

 

अपने पिता की मृत्यु के बाद, अपने घर के साथ-साथ अपर्णा ने  समाज के लिए देखें अपने पापा के सपनों की भी जिम्मेदारी ली। एक महिला के रूप में, उनका मानना है कि लड़कियों की शुरुआती उम्र में शादी करने के बजाय उमके सपने को साकार करने का मौका देना महतवपूर्ण है।भारतीय परिवारों के पारंपरिक सेटअप में लिंग का खेल जाति और धर्म जैसे अन्य पहलुओं द्वारा भेदभाव के लिए आधार रहा है। एक अच्छी तरह से सूचित व्यक्ति होने के नाते अपर्णा समाज की मानसिकता में बदलाव लाने की इच्छा रखती है।ये तभी संभव हैं जब सभी लोग बिना किसी भेद-भाव के हिंसा मुक्त और न्यायसंगत समाज बनाने के लिए अग्रसर होंगे ।अपर्णा कहती हैं की जब भी वो निराश होती है है तो अपने पापा की लिखी कवितायें पढ़ती हैं|ये कवितायें उन्हें मुश्किल समय से बाहर आने में मदद करती हैं|

 

अपने निजी जीवन के संघर्ष और उतार-चढ़ावों से सबक लेती अपर्णा ने औरों को भी अपनी इच्छाओं के प्रति दृढ रहना सिखाया है। समाज में मौजूद दिव्यांगजनों और असहाय लोगों को मुख्य्धारण से जोड़ने का काम कर रहीं अपर्णा मिश्र को ‘स्वयं सिद्धा अवार्ड’ और ‘सशक्त नारी सम्मान’,’जीवन जाग्रति सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है।

 

समाजिक कार्यों के आलवा अपर्णा मिश्रा समय-समय पर साहित्य के उत्थान के लिए भी काम करती रहीं हैं।अपने पिता स्वर्गीय डॉ० के.एन मिश्रा की याद में आयोजित धर्मार्थ कार्यक्रम ‘कोई दीवाना कहता है’ में भी अपर्णा ने दिव्यांगजनों को विशेषता दी थी।चाहे बात श्रवण सहायता मशीन की हो या फिर व्हीलचेयर की,असहाय और दिव्यांग-से-बड़ी हर जरुरत का ख्याल रखती है सद्भावना समिति

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