सिमरन' की कहानी कंगना ने नहीं, मैंने लिखी है: अपूर्व असरानी

18 May 2017 20:16:42 pm

नई दिल्ली
दरअसल इस पोस्टर में नीचे बहुत छोटे-छोटे लेकिन अहम अक्षरों में फिल्म के राइटर 'अलीगढ़' और 'शाहिद' फेम अपूर्व असरानी के नाम के पहले कंगना रनौत का नाम बतौर अडिशनल डायलॉग और स्टोरी राइटर लिखा गया है। इससे पहले भी कई इंटरव्यूज में कंगना और खुद हंसल भी फिल्म की कहानी लिखने का क्रेडिट कंगना को देते रहे हैं। फाइनली इस पर अपूर्व ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। बुधवार सुबह एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से अपूर्व ने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है।

अपूर्व ने लिखा है कि-
मैंने सिस्टम के खिलाफ कंगना की लड़ाई में उनका समर्थन किया है। एक सेल्फ-मेड इंसान और इस इंडस्ट्री में एक वक्त बाहरी होने के अनुभव से खुद भी दो-चार होने के नाते मैं कंगना के यहां टिके रहने की लड़ाई में उनके साहस की प्रशंसा करता हूं।

इसके बाद उन्होंने मुद्दे की बात पर आते हुए लिखा, मुझे पता है कि फिल्म (सिमरन) के क्रेडिट्स को लेकर कुछ विरोध है। आप में से कई लोगों ने पोस्टर पर मेरे नाम के पहले कंगना के 'अडिशनल डायलॉग और स्टोरी' क्रेडिट पर अपना गुस्सा जाहिर किया और मैं आप लोगों के इस सपॉर्ट के लिए आपका शुक्रगुजार हूं।

किसी राइटर का नाम अडिशनल राइटिंग क्रेडिट के बाद धकेल दिया जाना उस राइटर की प्रतिष्ठा के खिलाफ है लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरी चिंता 'क्रेडिट' को लेकर नहीं है, असल में कुछ इससे भी बड़ा है जो मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्यों किया गया।

कंगना कई इंटरव्यूज में दावा कर रही हैं कि सिमरन के डायरेक्टर हंसल मेहता उनके पास केवल एक लाइन का स्क्रीनप्ले लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि उस स्टेज पर स्टोरी डार्क और ग्रिटी थ्रिलर थी और उन्होंने खुद इस स्टोरी को एक हल्की-फुल्की, मजेदार स्टोरी में तब्दील किया।

उनके ये बयान मेरे प्रयासों को पूरी तरह नकार रहे हैं और मुझे यह जानते हुए भी अब इस झूठ को उजागर करना पड़ रहा है कि ऐसा करने से उनके कई प्रशंसक मेरे खिलाफ हो जाएंगे। जो लोग मुझसे परिचित हैं वे जानते हैं कि मैंने हमेशा सच की लड़ाई लड़ी है और यह मेरे लिए एक हिट फिल्म से कहीं ज्यादा मायने रखता है।

हंसल ने मुझे अमेरिका में कानून का उल्लंघन करने वाली एक औरत की खबर भेजी थी। मुझे यह पसंद आई और मैंने सोचा कि इस पर एक बहुत अच्छी फिल्म बन सकती है। लेकिन मैं 'अलीगढ़' के बाद एक और सीरियल फिल्म नहीं करना चाहता था। 'अलीगढ़' के साथ मेरा अनुभव इतना जबर्दस्त था कि इस फिल्म ने मुझे अंदर से पूरी तरह मथ दिया था और मैं भावनात्मक तौर पर बहुत खाली महसूस कर रहा था। ऐसे में 'सिमरन' के रूप में मुझे कुछ मजेदार लिखने का मौका मिल रहा था। यह 2 साल पहले की बात है।

मैंने हंसल की कंपनी कर्मा फीचर्स के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। फिल्म के शुरुआती आइडिया को एक ऑरिजिनल स्टोरी में डिवेलप किया और एक लाइन का स्क्रीनप्ले लिखा। हंसल को यह पसंद आया और वह मुझे कंगना से मिलाने ले गए। कंगना ने वह स्क्रीनप्ले सुना और खुशी से चहक उठीं। उन्होंने हमसे कहा कि वह यह फिल्म करेंगी।

अपनी फेवरिट ऐक्ट्रेस के साथ काम करने को लेकर मैं उत्साहित था। मैंने फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए रिसर्च और डिवेलपमेंट पर काम करना शुरू कर दिया। मैं अमेरिका गया और फिल्म के सब्जेक्ट पर काफी अध्ययन किया। मैं वहां कई लोगों से मिला जिन्होंने स्टोरी आइडिया में काफी अच्छा योगदान दिया। इसके बाद मैं वापस आ गया और फिल्म की कहानी लिखनी शुरू कर दी।

मैंने स्क्रिप्ट के 9 ड्राफ्ट लिखे। हर ड्राफ्ट के साथ मैं किरदार में और गहरे उतरता चला गया। मैंने उनके (कंगना) किरदार को एक पहचान दी, मोटिव दिये और उस किरदार में रंग भरे। कंगना और हंसल, दोनों ने मुझे महत्वपूर्ण इनपुट्स दिए जिनमें से मैंने कुछ इनपुट शामिल किए और कुछ खारिज किए। दोनों हमेशा मेरे काम से खुश थे। मेरे पास इस बात का सबूत है। साथ ही, राइटर फिल्म के निर्देशक के लिए लिखता है और उसका अप्रूवल हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

डेढ़ साल के दौरान 9 ड्राफ्ट लिखते वक्त किसी भी मौके पर इसको लेकर कोई बात सामने नहीं आई कि कंगना को स्क्रिप्ट का डायरेक्शन या टोन पसंद नहीं आई। बल्कि जब-जब मैं उनको स्क्रिप्ट सुनाता था तो वह खुशी से उछल पड़ती थीं।

जब वे फिल्म की शूटिंग के लिए गए तो मैंने कुछ अफवाहें सुनीं लेकिन मैं अभी उन पर ज्यादा बात नहीं करना चाहूंगा। मैं बहुत उत्साह से उनकी वापसी का इंतजार कर रहा था और जब वे इसी साल कुछ महीने पहले शूटिंग खत्म करके वापस आए तो मैं फिल्म की एडिटिंग में व्यस्त हो गया।

मैं यह देखकर बहुत खुश था कि पूरी की पूरी फिल्म उसी स्टोरी और स्क्रीनप्ले पर शूट की गई है जिसे मैंने फिल्म राइटर्स असोसिएशन में रजिस्टर कराया था। मैंने नोटिस किया कि कंगना ने कई डायलॉग्स इंप्रवाइज किए हैं और मुझे यह इंप्रवाइजेशन बहुत अच्छा लगा, यह मेरी लिखी स्टोरी के भावों मुताबिक ही था।

किसी भी स्टेज पर मुझे इस बात का अहसास नहीं हुआ कि आगे ऐसा कुछ होने वाला है। जब मैंने फिल्म का पहला कट फिनिश किया उसके अगले दिन हंसल ने मुझे मिलने बुलाया। उन्होंने परेशान होते हुए मुझे बताया कि डायरेक्टर बनने जा रही कंगना ने इस फिल्म में को-राइटर के क्रेडिट की मांग की है।

स्वाभाविक रूप से मुझे इस पर बहुत गुस्सा आया। मैं अपने साथ हुए इस धोखे पर स्तब्ध था। मैंने यह डिमांड मानने से इनकार कर दिया। 2 महीने तक वह (हंसल) और उनके को-प्रड्यूसर शैलेश कंगना को को-राइटर क्रेडिट देने के लिए मुझे पर दबाव डालते रहे। इसके लिए उन्होंने क्या-क्या किया, यह सब मैं बाद में कभी बताऊंगा।

आखिरकार मैं 'अडिशनल राइटिंग क्रेडिट' देने के लिए तैयार हो गया लेकिन यह भी मैंने केवल इसलिए किया क्योंकि उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं ऐसा नहीं करूंगा तो उनकी फिल्म अटक जाएगी। साथ ही मैंने उनसे रिटेन प्रॉमिस लिया कि वह कंगना को को-राइटर का नहीं बल्कि अडिशनल राइटर का क्रेडिट देंगे।

और आज न केवल फिल्म के पोस्टर पर मैंने उनका क्रेडिट अपने नाम के पहले देखा (इस विषय पर मैंने न लड़ने का फैसला लिया), बल्कि मैंने यह भी देखा कि कंगना ने एक दिन पहले अपने फेसबुक लाइव इवेंट में यह दावा किया कि उन्होंने खुद (हंसल के साथ मिलकर) एक लाइन की स्क्रिप्ट को पूरी फिल्म में तब्दील किया है। इससे पहले ही वह अप्रैल में दिए एक इंटरव्यू में 'वन लाइन स्क्रिप्ट' के लिए भी मेरे क्रेडिट को यह कहकर खारिज कर चुकी हैं कि यह एक डार्क और ग्रिटी थ्रिलर थी जिसे उन्होंने अपनी राइटिंग स्किल्स से पूरी तरह नई फिल्म में तब्दील किया।

मैंने बहुत समय तक कोशिश की कि मैं इस मामले में मर्यादा बनाए रखूं लेकिन मैं यह नहीं समझ पाया कि कंगना एक राइटर की कड़ी मेहनत से तैयार की गई स्क्रिप्ट को अपने नाम क्यों करेंगी। काश कंगना इस मामले में शिष्टता बरतते हुए इस फिल्म के लिए की गई मेरी मेहनत को स्वीकार करतीं।

मैं यह भी उम्मीद करता हूं कि मेरे प्रिय मित्र हंसल इस मामले में कोई स्टैंड लें और या तो मेरी बातों का खंडन करें या फिर सहमति दर्ज कराएं।

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