तंबाकू की गुलामी से आज़ादी कैसे पाये?

06 Jun 2019 17:32:01 pm

धूम्रपान का महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव---
तंबाकू में निकोटिन नाम का एक जहर होता है और यह हमारे सभी अंगों को निष्क्रिय और बेकार कर देता है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं में इनफर्टिलिटी, अपरिपक्व डिलीवरी ,नवजात शिशु का वजन अत्यधिक कम, सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम, अनियमित मासिक धर्म, एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना, मूड स्विंग्स, कम उम्र में मेनोपॉज हो जाना, गर्भधारण संबंधी समस्याएं आदि प्रायः देखी जाती हैं।
इसके अलावा बहुत अधिक संख्या में सांस लेने की समस्याएं, हृदय आघात, बहुत से अंगों में कैंसर, आदि भी जानलेवा रूप में दिखाई देती है।
यदि गर्भवती महिला धूम्रपान करती है तो बच्चे का मानसिक विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है। सिगरेट पीने से इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है और व्यक्ति बहुत जल्दी-जल्दी बीमार होता है। मसूड़ों और दांतों की समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। मसूड़ों में सूजन ,रक्त स्राव, दांतो का कमजोर तथा पीले और काले हो जाना आम बात है। इसके अलावा धूम्रपान करने वाली महिलाओं में त्वचा में झुर्रियां, बाल झड़ना, जल्दी बुढ़ापा आ जाना जैसे लक्षण दिखते हैं।

बहुत बार देखा गया है कि आज के नौजवान हाईफाई बनने के लिए धूम्रपान करते हैं और फिर इसकी लत के शिकार हो जाते हैं। धूम्रपान करने पर प्रारंभ में बहुत आराम मिलता है जो की चिंता, तनाव और दबाव को दूर भगा देता है। लेकिन धीरे धीरे शरीर और दिमाग इसका आदी हो जाता है और निष्क्रियता आने लगती है।
*लक्षण*
निराशा ,हताशा ,चिंता, सिर दर्द, उल्टी की इच्छा ,डायरिया ,ब्लड प्रेशर और पल्स रेट का कम हो जाना ,ध्यान और एकाग्रता में कमी ,शिथिल शरीर।
*धूम्रपान की लत से बचने के उपाय*
सबसे पहले एक लिस्ट बनानी चाहिए और उसमें यह लिखना चाहिए कि किन कारणों की वजह से धूम्रपान करना शुरू किया और किन कारणों की वजह से अब छोड़ना चाहते हैं।
 धूम्रपान छोड़ते ही बहुत सारे लाभ दिखाई पड़ने लगते हैं जैसे कि साफ-सुथरी त्वचा ,ओरल हेल्थ अच्छे हो जाती है, हार्मोन नियंत्रित, इम्यून सिस्टम का मजबूत होना, कैंसर का रिस्क कम हो जाना, दांत और बाल स्वस्थ हो जाना आदि।

लेकिन धूम्रपान को छोड़ने का प्रयास ही बहुत बड़ा चैलेंज होता है। धूम्रपान छोड़ने के दौरान खांसी आना अधिक बढ़ जाती है जिसका अर्थ है की शरीर के फेफड़ों में एकत्रित अनावश्यक म्यूकस शरीर से बाहर निकल रहा है। मस्तिष्क की रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलना शुरू हो जाने से सिर में बहुत हल्का पन और अच्छा महसूस होता है।
धूम्रपान की लत छोड़ने के दौरान अपने आप को व्यस्त रखने का प्रयास करना चाहिए, अकेलेपन से बचना चाहिए और यह भी सोचना चाहिए कि 1 दिन के धूम्रपान में कितना धन व्यय होता है। अपना मनपसंद कोई एक शौक अपना लेना चाहिए जैसे कि गाने सुनना ,नृत्य करना ,पेंटिंग करना ,पढ़ना।
धूम्रपान के कुछ सब्सीट्यूट भी आते हैं जिनमें ऐसी स्मोकिंग हर्ब होती हैं जिसमें निकोटिन नहीं होता है।
 मसाज और स्पा लेकर खुद को मानसिक सुकून देने का प्रयास करना चाहिए। सिगरेट की जगह पर सौंफ, मिश्री ,इलायची तथा गाजर की पतली पतली स्टिक काटकर मुंह में रखनी चाहिए। धूम्रपान करने वाले अपने मुंह में हमेशा कुछ रख ने के आदी होते हैं उसके लिए सौंफ, मिश्री और इलायची चबाना चाहिए।

*योग का प्रभाव*
इंसान के मन का जो स्वभाव है वह हमेशा खुशियां, मौज मस्ती, संतोष और सुख ढूंढता है ।ईश्वर ने हमारे मन को 5 संवेदनाएं दिए हैं ,देखना ,सुनना ,सूंघना, चखना और छूना। और जब इन 5 संवेदना ओं से भी हमारा मन संतुष्ट नहीं होता है ,वहीं से क्रेविंग शुरू होती है।
 परम और चरम सुख की तलाश में इंसान एडिक्शन और निर्भरता के जाल में फंसता चला जाता है।

 सिगरेट के धुए में 4000 से अधिक रसायन होते हैं, जिसमें 50 से अधिक कैंसर जन्य हैं।WHO के द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू से करीब 6 मिलियन लोगों की जान प्रतिवर्ष जाती है।
तंबाकू की लत छोड़ने में तीन मुख्य तरीके बहुत कारगर हैं---
*डर, लालच तथा प्रेम स्नेह*
यदि डॉक्टर यह कहता है कि एक और सिगरेट पीने पर आप के फेफड़े खराब हो जाएंगे और आप की मौत हो सकती है तो आप डर कर भी तंबाकू छोड़ने का इरादा बना सकते हैं।
यदि आपको कोई किसी तरह का लालच या प्रलोभन दे।
प्रेम और स्नेह से तो इस पूरे जगत को जीता जा सकता है

*योग ,प्राणायाम और मेडिटेशन* परम सुख और संतोष प्राप्त करने के सबसे आसान साधन है। खुशी का भंडार हमारे अंदर है ।योग द्वारा हमें उस खुशी के भंडार को महसूस करना और लूटना होता है।
तनाव को दूर भगाने के लिए सुदर्शन की क्रिया करना चाहिए।

*कपालभाति प्राणायाम* रक्त संचार बढ़ता है। तंत्रिका तंत्र को ऊर्जा प्रदान करता है ,दिमाग की कोशिकाओं को तरोताजा करता है। मन को शांत करके धूम्रपान की लत को कम करता है।

*नाड़ी शोधन प्राणायाम* भी श्वसन संबंधी सभी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

*भुजंगासन* में सीने का फैलाव होता है जिससे श्वसन संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और धूम्रपान की अज को  कम करता है।
*सेतु बंधन* आसन यह फेफड़े को मजबूत करता है और सभी अंगों में ऑक्सीजन पहुंचाता है।

इसके अलावा सर्वांगासन, शिशु आसन ,त्रिकोणासन तथा शवासन धूम्रपान की लत को छोड़ने में बहुत अधिक कारगर हैं।
 *कहते हैं ना कि चिंता चिता समान*
सभी तरह की चिंता को दूर करके खुश रहना चाहिए।
*HALT* से बचना होता है।
बहुत अधिक भूखा नहीं रहना है बहुत अधिक गुस्सा नहीं लाना है बहुत अधिक अकेलापन नहीं होना चाहिए और बहुत अधिक थकान नहीं होनी चाहिए।
यह चारों ऐसे तत्व है जो धूम्रपान की ओर खींचते हैं।
H .Hungry
A .Angry
L .Lonely
T .Tired
तंबाकू तथा धूम्रपान की लत से बचने के लिए हमें अपने शरीर में तीन तरह के कारखाने पैदा करने होंगे।
1.अपने दिमाग में बर्फ का कारखाना जिससे कि हमारा मस्तिष्क शांत और ठंडा रहे।
2.अपनी जीभ पर चीनी का कारखाना जिससे कि हमारी बोली में सदा मिठास बनी रहे।
3.अपने हृदय में प्रेम और स्नेह का कारखाना जिससे कि हमारे मन में सभी के लिए प्रेम और सदभाव बना रहे। जिससे कि हम किसी भी तरह की हताशा और निराशा के शिकार होकर धूम्रपान की तरफ कदम ना बढ़ाए।

*काम करो ऐसा कि पहचान बन जाए।
पग पग चलो ऐसे कि निशान बन जाए।
यहां जिंदगी तो सब काट ते हैं
जिंदगी ऐसे जियो कि मिसाल बन जाए।*
लेखिका: ओम कुमारी सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित योग एवं नेचरोपैथ तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक हैं।

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